भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव करवाना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक काम है। हर चुनाव में एक सवाल जरूर उठता है—क्या EVM भरोसेमंद है? क्या इसमें गड़बड़ी हो सकती है?
आइए बिना तकनीकी शब्दों में घुसे, बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं कि EVM में सच में कितना भरोसा किया जा सकता है।
EVM (Electronic Voting Machine) दो हिस्सों वाली मशीन है:
Ballot Unit (BU) – जहां वोटर बटन दबाता है
Control Unit (CU) – जो मतदान अधिकारी के पास रहती है और वोट रिकॉर्ड करती है
सबसे बड़ी बात—EVM किसी भी नेटवर्क से नहीं जुड़ती।
इसमें WiFi, Bluetooth, SIM, Internet—कुछ भी नहीं होता।
यानी इसे दूर बैठे कोई हैक नहीं कर सकता।
तकनीकी रूप से नहीं। इसके कारण:
EVM बिल्कुल standalone device है
इसमें बाहरी कम्युनिकेशन नहीं होता
सॉफ्टवेयर one-time programmable होता है (एक बार लिखा → बदल नहीं सकता)
मशीन की हर मूवमेंट सील और सुरक्षा में होती है
किसी को भी मशीन तक अकेले पहुँचने की अनुमति नहीं होती
मतलब, इसे हैक करने के लिए मशीन को सीधे पकड़ना पड़ेगा—जो चुनाव आयोग के 24×7 निगरानी सिस्टम में लगभग असंभव है।
VVPAT (Voter Verified Paper Audit Trail) का मतलब:
आप बटन दबाते हैं
सामने स्क्रीन पर 7 सेकंड के लिए आपके वोट की पर्ची दिखती है
वह पर्ची मशीन के अंदर सुरक्षित चली जाती है
अगर विवाद हो, तो कागज़ की पर्चियों से भी मिलान किया जा सकता है।
इससे EVM में पारदर्शिता और मजबूत हो गई है।
भारत की EVM में ये सुरक्षा स्तर लागू होते हैं:
तकनीकी टीम, राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग की संयुक्त जांच
सीलिंग और नंबरिंग—जिसका रिकॉर्ड हर पार्टी के पास
CCTV निगरानी
स्ट्रॉन्ग रूम में 24 घंटे पुलिस सुरक्षा
उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को स्ट्रॉन्ग रूम दिखाना
Counting दिन सभी की मौजूदगी में मशीन खोली जाती है
किसी भी मशीन का रैंडम चेक VVPAT से मिलान
इतना कठोर सिस्टम दुनिया में शायद ही कहीं हो।
यह सवाल भी जरूरी है।
कई बार राजनीतिक दल हार का ठीकरा मशीन पर फोड़ देते हैं
सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलती है
लोग तकनीकी प्रक्रिया को ठीक से जानते नहीं
अफवाहें ज्यादा तेजी से चलती हैं
यही कारण है कि EVM पर बहस खत्म नहीं होती।
तकनीक, सुरक्षा और निगरानी के लिहाज़ से—हाँ, भारत की EVM बेहद सुरक्षित है।
VVPAT की वजह से यह प्रक्रिया और भी पारदर्शी हो चुकी है।
अगर कहीं गड़बड़ी होती तो हर विधानसभा/लोकसभा में नतीजे समान दिशा में जाते—जो कि भारत में कभी नहीं हुआ।
EVM पर भरोसा रखने की सबसे बड़ी वजह यही है कि यह पूरी तरह ऑफलाइन, सरल और छेड़छाड़-रोधी तकनीक है।
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Sonu Yadav