Special Intensive Revision (SIR) — चुनावी प्रबंधन का एक नया चरण

Special Intensive Revision (SIR) — चुनावी प्रबंधन का एक नया चरण

चुनाव आयोग (Election Commission of India, ECI) ने हाल में Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया शुरू की है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (electoral rolls) को अधिक विश्वसनीय, स्वच्छ और अपडेटेड बनाना है। यह सिर्फ एक साधारण नाम-संशोधन (revision) नहीं है, बल्कि गहन और विशेष रूप से डिजाइन किया गया कदम है, ताकि हर पात्र नागरिक शामिल हो सके और गैरपात्र मतदाताओं का नाम सूची से हटाया जाए। CEO Bihar+2AAJ Tak+2


SIR क्यों ज़रूरी है? (Need & Rationale)

  1. लोकतंत्र की मजबूती
    SIR लोकतंत्र की शुचिता (integrity) सुनिश्चित करने का एक तरीका है — ECI ने कहा है कि यह सुनिश्चित करना है कि वोटर सूची में सिर्फ योग्य नागरिक हों और डुप्लिकेट या गलत प्रविष्टियाँ हटाई जाएँ। CEO Bihar

  2. संविधान और कानून का आधार

    • चुनाव आयोग ने अपनी SIR पॉलिसी का आधार Representation of the People Act, 1950 की धारा 21 में बताया है। Supreme Court Observer+1

    • इसके अलावा, अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण की शक्ति देता है। PW Only IAS

  3. जनसंख्या व स्थलांतरण के बदलाव
    पिछले कई वर्षों में शहरीकरण, प्रवासन (migration) और जनसंख्या संरचना बदल गई है, जिससे मतदाता सूची में त्रुटियाँ होने की संभावना बढ़ी है। SIR इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए सूची को अपडेट करने का काम करता है। The India Forum

  4. नए मतदाताओं की पहचान
    SIR का एक मकसद यह भी है कि नए पात्र मतदाता (जिनकी उम्र पूरी हो गई है, जैसे 18 वर्ष) सूची में शामिल हों। Drishti IAS


SIR प्रक्रिया: कैसे काम करती है? (Process & Management)

  • घरेलू सत्यापन (House-to-House Verification): ECI BLOs (Booth Level Officers) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करते हैं। CEO Bihar

  • दस्तावेज़ीकरण (Documentation): SIR में कुछ विशेष दस्तावेज़ों की मांग की गई है — जैसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, माता-पिता के नाम का पुराना वोटर-रोल रिकॉर्ड आदि। AAJ Tak

  • तय तारीख (Qualifying Date): ECI ने SIR के लिए एक “qualifying date” निर्धारित की है (जैसे नोटिफिकेशन में 01.07.2025 का उपयोग किया गया है)। Supreme Court Observer

  • अपील और शिकायत (Grievance Redressal): जिनका नाम हटाया गया या जिनकी जानकारी में विवाद है, वे पहले चरण में अपील कर सकते हैं। khabargaon.com


कानूनी और संवैधानिक विमर्श (Legal & Constitutional Debate)

  • ECI की स्वायत्तता: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि SIR टाइमिंग और रिविजन नीति पर उसका “complete discretion” है। The Indian Express+1

  • नए टर्म का सवाल: कुछ आलोचकों ने कहा है कि “Special Intensive Revision” शब्द चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों में नहीं है। The Wire

  • न्यायालयीय समर्थन: कुछ वकीलों ने SIR को पूरी तरह कानूनसम्मत कहा है। TV9 Bharatvarsh

  • संविधान-धार्मिक विवाद: SIR को लेकर कुछ पार्टियों और नागरिकों ने भी सवाल उठाए हैं कि इससे मतदाता हानि हो सकती है। Navbharat Times


प्रमुख घटक (Key Components): Notifications, Handbooks & Others

  • Notifications (अधिसूचनाएं): ECI की ओर से प्रेस नोट जारी किए गए हैं, जिनमें SIR की शुरूआत, उसके उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी दी गयी है। CEO Bihar

  • Election Laws (चुनाव कानून): SIR का कानूनी आधार RPA 1950 की धारा 21 में है, साथ ही ECI नियमों (Registration of Electors Rules) के अंतर्गत रिविजन विकल्प चुनने का अधिकार है। The India Forum

  • Handbooks & Guides: ECI और राज्य CEO (Chief Electoral Officer) ऑफ़िस द्वारा मतदाताओं और BLOs के लिए गाइडलाइंस और हैंडबुक जारी की जाती हैं, ताकि SIR प्रक्रिया पारदर्शी और संगठित हो।


SIR के फायदे और चुनौतियाँ (Pros & Challenges)

फायदे:

  • मतदाता सूची की स्वच्छता बढ़ाना

  • डुप्लीकेट वोटर्स को हटाना

  • नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना

  • चुनावी विश्वास (credibility) को मजबूत करना

चुनौतियाँ:

  • बहुत से लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि SIR से किसी के नाम अनायास हट जाएँगे? khabargaon.com

  • दस्तावेज़ों की मांग से कुछ लोग हाशिए पर जा सकते हैं, खासकर वो जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल रिकॉर्ड नहीं है। AAJ Tak

  • इसमें समय और संसाधन की बहुत बड़ी ज़रूरत है (BLO-मैनपावर, लॉजिस्टिक्स)।


निष्कर्ष (Conclusion)

Special Intensive Revision (SIR) सिर्फ एक तकनीकी व्यायाम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की कोशिश है — ECI इसे मतदाता सूची की “शुचिता + पारदर्शिता + सहभागिता” बढ़ाने का जरिया मानता है।

लेकिन यह भी ज़रूरी है कि इस प्रक्रिया में न्याय, समावेशिता और संवैधानिक मानदंडों का पूरा ध्यान रखा जाए। क्योंकि अगर किसी योग्य नागरिक का नाम गलती से हट जाए, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हो सकती है।

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